विद्या प्रचारिणी सभा विवाद गहराया, एडहॉक कमेटी बोली—अब सत्ता और सत्य की लड़ाई

Vidya Pracharini Sabha Dispute Deepens: Ad-hoc Committee Declares—"Now, It Is a Battle Between Power and Truth."

विद्या प्रचारिणी सभा विवाद गहराया, एडहॉक कमेटी बोली—अब सत्ता और सत्य की लड़ाई


विद्या प्रचारिणी सभा विवाद गहराया, एडहॉक कमेटी बोली—अब सत्ता और सत्य की लड़ाई


उदयपुर। विद्या प्रचारिणी सभा में चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। शनिवार को गठित एडहॉक कमेटी ने प्रेस वार्ता कर वर्तमान कार्यकारिणी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह अब केवल प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि सत्ता और सत्य की लड़ाई बन चुका है। कमेटी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संस्था कोई निजी कंपनी नहीं है, जिसे विरोधियों के इशारों पर मनमाने ढंग से चलाया जाए।
प्रेस वार्ता में एडहॉक कमेटी के सदस्यों ने कार्यकारिणी द्वारा बनाए गए 54 नए सदस्यों की नियुक्तियों पर सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि इन नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद को बढ़ावा दिया गया और नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से चयन किया गया। साथ ही संस्था में वित्तीय अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गईं। कमेटी का कहना है कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है और इसके लिए उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा।
प्रेम सिंह शक्तावत ने अपने संबोधन में मेवाड़ की ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि त्याग, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की प्रतीक रही है। उन्होंने महाराणा भूपाल सिंह का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने मेवाड़ का भारत में विलय कर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा और अपनी निजी संपत्ति का बड़ा हिस्सा राज्य को समर्पित किया। शक्तावत ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने पूर्वजों के माध्यम से इस संस्था को खड़ा किया और उसे समाज को समर्पित किया, वे कभी भी उस पर कब्जा करने की मानसिकता नहीं रख सकते।
उन्होंने इशारों-इशारों में राजनीतिक हस्तक्षेप पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति में सक्रिय लोगों को अपनी वाणी और व्यवहार पर संयम रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपनी मर्यादा का उल्लंघन किया है, वे अब माफी मांगने को मजबूर हो रहे हैं और भविष्य में भी उन्हें ऐसा करना पड़ेगा। शक्तावत ने दोहराया कि पद और अधिकार छीने जा सकते हैं, लेकिन आस्था और श्रद्धा को नहीं छीना जा सकता। “हम विश्वराज सिंह मेवाड़ को महाराणा मानते हैं और मानते रहेंगे। यदि उनके सम्मान पर कोई आंच आई, तो एडहॉक कमेटी पूरी मजबूती के साथ उनके समर्थन में खड़ी नजर आएगी।”
एडवोकेट नरेंद्र सिंह कच्छावा ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि संस्था के प्रधान संरक्षक विश्वराज सिंह मेवाड़ को वित्तीय अनियमितताओं की कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसके बाद न्यायालय के आदेश के उपरांत एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। प्रारंभिक चरण में पूर्व कार्यकारिणी ने इस ऑडिट प्रक्रिया में सहयोग किया, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी और अनियमितताओं के संकेत मिलने लगे, कार्यकारिणी का रवैया बदल गया और सहयोग बंद कर दिया गया।
कच्छावा ने यह भी आरोप लगाया कि एडहॉक कमेटी पिछले चार दिनों से संस्था के दस्तावेजों और कार्यालय तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, लेकिन संबंधित स्थानों पर ताले लगा दिए गए हैं, जिससे जांच प्रक्रिया बाधित हो रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है और यह दर्शाती है कि कुछ तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।
कमेटी ने स्पष्ट किया कि पूर्व प्रबंध समिति को जबरदस्ती नहीं हटाया गया है। वास्तविकता यह है कि 12 फरवरी 2026 को उनका कार्यकाल समाप्त हो गया था और वे अनैतिक रूप से बिना किसी वैधानिक पद के ताले लगाकर बैठे हुए हैं। ऐसी स्थिति में जब किसी भी कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो जाता है, तो संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत संस्था के अध्यक्ष और प्रधान संरक्षक को अस्थायी रूप से संचालन के लिए नई कमेटी गठित करने का अधिकार होता है। न्यायालय के आदेश के आधार पर ही 11 सदस्यीय एडहॉक कमेटी का गठन किया गया है, जो पूरी तरह वैधानिक रूप से कार्यभार संभाल रही है।
एडहॉक कमेटी ने मांग की है कि ऑडिट प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के पूरा कराया जाए, वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही 54 नए सदस्यों की नियुक्तियों की वैधता की भी समीक्षा की जाए, ताकि संस्था की गरिमा और पारदर्शिता बनी रहे।
प्रेस वार्ता में चेयरपर्सन डॉ. युवराज सिंह झाला, देवेंद्र सिंह शक्तावत, नकूल सिंह भाटी, विजेंद्र सिंह चूंडावत सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कमेटी ने स्पष्ट किया कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती और संस्था में पारदर्शिता स्थापित नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।