शिल्पग्राम उत्सव 2025 उदयपुर: कर्ण ढोल की अद्भुत प्रस्तुति, लोक नृत्यों ने जीता दिल
उदयपुर के शिल्पग्राम उत्सव 2025 में कर्ण ढोल, मल्लखंभ, गरबा, जगरना और संभलपुरी नृत्य सहित देशभर की लोक कलाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
शिल्पग्राम उत्सव 2025: लोक कलाओं के रंग में रंगा उदयपुर, कर्ण ढोल की अद्भुत प्रस्तुति ने किया चकित
उदयपुर, 24 दिसंबर।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित हो रहे दस दिवसीय शिल्पग्राम उत्सव 2025 में लोक कलाओं की विविधता और जीवंतता ने दर्शकों का दिल जीत लिया। उत्सव के चौथे दिन बुधवार शाम मुक्ताकाशी मंच पर प्रस्तुत कार्यक्रमों में देश के विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृतियां एक साथ साकार होती नजर आईं।
कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण महाराष्ट्र की परंपरागत कर्ण ढोल (शब्द भेद) की प्रस्तुति रही। आंखों पर पट्टी बांधकर कलाकार द्वारा सैकड़ों दर्शकों की भीड़ में से नारियल खोज निकालने की इस अनूठी कला ने दर्शकों को स्तब्ध कर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच इस अद्भुत प्रदर्शन को खूब सराहा गया।
विभिन्न राज्यों की लोक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
उत्सव में गुजरात का पारंपरिक गरबा, जम्मू का डोगरी लोक नृत्य जगरना, राजस्थान का नगाड़ा वादन, सहरिया स्वांग और सफेद आंगी गेर ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
गोवा की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत देखनी नृत्य, मणिपुर का लाई हारोबा, त्रिपुरा का संतुलन साधता होजागिरी नृत्य और ओडिशा की जनजातीय संस्कृति को दर्शाता संभलपुरी नृत्य दर्शकों की खास पसंद रहे।
वहीं, महाराष्ट्र के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत मल्लखंभ के रोमांचक करतबों ने कार्यक्रम में ऊर्जा भर दी, तो हरियाणा के घूमर और राजस्थान के लोक देवता गोगाजी को समर्पित डेरू नृत्य को भी खूब सराहना मिली। कार्यक्रम का संचालन मोहिता दीक्षित और यश दीक्षित ने किया।
लेकसिटी का कला प्रेम बना प्रेरणा: निदेशक फुरकान खान
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान ने कहा कि मेवाड़ और विशेष रूप से उदयपुर के लोगों का कला प्रेम देशभर में मिसाल बन चुका है। यही कारण है कि शिल्पग्राम उत्सव हर वर्ष नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने बताया कि शिल्पग्राम प्रांगण में चार पद्म पुरस्कार प्राप्त कलाकारों सहित कुल 15 प्रतिष्ठित चित्रकारों द्वारा आयोजित कला शिविर और विभिन्न कार्यशालाओं में सभी आयु वर्ग के लोग उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।

‘हिवड़ा री हूक’ में उभर रही नई प्रतिभाएं
बंजारा मंच पर आयोजित ‘हिवड़ा री हूक’ कार्यक्रम के चौथे दिन भी युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। यह मंच उन प्रतिभाओं को अवसर देता है, जिन्हें अब तक प्रदर्शन का अवसर नहीं मिला। कार्यक्रम में गीत-संगीत के साथ-साथ संचालक सौरभ भट्ट की रोचक प्रश्नोत्तरी ने दर्शकों को बांधे रखा, वहीं सही उत्तर देने वालों को मौके पर ही उपहार प्रदान किए गए।
थड़ों पर साकार हो रही लोक संस्कृति
शिल्पग्राम के विभिन्न थड़ों पर सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक लोक प्रस्तुतियों की निरंतर श्रृंखला जारी है। गवरी, चकरी, बाजीगरों के करतब, घूमट, पोवाड़ा, मांगणियार गायन, मसक वादन, बीन-जोगी, कच्ची घोड़ी और कठपुतली नृत्य ने मेलार्थियों का भरपूर मनोरंजन किया।
इसके अलावा बहरूपियों की रंग-बिरंगी वेशभूषा, पत्थर की कलाकृतियां और सेल्फी पॉइंट्स भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

कला शिविर का समापन आज
21 दिसंबर से प्रारंभ हुआ कला शिविर गुरुवार को संपन्न होगा। देश के 15 नामचीन चित्रकार यहां अपनी कला का लाइव प्रदर्शन कर रहे हैं और कला प्रेमियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी कर रहे हैं, जिनमें पांच पद्म पुरस्कार प्राप्त कलाकार शामिल हैं।
आज शाम के खास आकर्षण
गुरुवार शाम मुक्ताकाशी मंच पर ओडिशा का गोटीपुआ, छत्तीसगढ़ का पंडवानी गायन, मणिपुर का पुंग ढोल चेलम और पश्चिम बंगाल का ऊर्जावान नटुआ लोक नृत्य विशेष आकर्षण रहेंगे।
इसके साथ ही राजस्थान, गुजरात, जम्मू, गोवा, हरियाणा, महाराष्ट्र और त्रिपुरा की लोक प्रस्तुतियां दर्शकों को एक बार फिर लोक संस्कृति के रंगों में सराबोर करेंगी।




