गाइड-वन्स अगेन नाटक का प्रथम मंचन – छह दशक बाद फिर मंच पर जीवंत हुआ गाइड फिल्म का जादू
Guide – Once Again premieres – Six decades later, the magic of the film Guide is brought to life on stage.
गाइड-वन्स अगेन नाटक का प्रथम मंचन – छह दशक बाद फिर मंच पर जीवंत हुआ गाइड फिल्म का जादू

उदयपुर, 28 सितम्बर। करीब 60 वर्ष पूर्व रूपहले पर्दे पर प्रदर्शित एवरग्रीन देव आनंद की फिल्म गाइड का जादू एक बार फिर मंच पर जीवंत हो उठा। उदयपुर में फिल्माई गई इस क्लासिक फिल्म से प्रेरित होकर साहित्यकार एवं उपनिदेशक जनसंपर्क गौरीकान्त शर्मा की पुरस्कृत कहानी गाइड-वन्स अगेन का मंचन शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी शिवराज सोनवाल के निर्देशन में रविवार को आरएनटी मेडिकल कॉलेज के न्यू ऑडिटोरियम में हुआ।
शहर के कलाकारों के समूह मौलिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ क्रिएटिव एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स और जीआर फिनमार्ट के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस प्रथम मंचन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कथानक, संवाद और निर्देशन की कसावट ने दर्शकों को ऐसा अहसास कराया जैसे यह कहानी उनके आसपास ही घट रही हो।

कार्यक्रम में अतिथि के रूप में कश्ती फाउण्डेशन की अध्यक्ष श्रद्धा मुर्डिया, नामचीन व्यवसायी श्रद्धा गट्टानी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं कला प्रेमी एडीजे कुलदीप शर्मा और शिक्षाविद् पीयुषचंद्र दशोरा उपस्थित रहे। प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत किया गया। लेखक गौरीकान्त शर्मा ने उपस्थित जनों को कहानी की पृष्ठभूमि से अवगत कराया।
उदयपुर से जुड़ा सांस्कृतिक रिश्ता 1965 में प्रदर्शित फिल्म गाइड की अधिकांश शूटिंग उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में हुई थी, जिसने न केवल भारतीय सिनेमा को नया आयाम दिया बल्कि उदयपुर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी पहचान दिलाई। इसी आधार पर प्रस्तुत गाइड-वन्स अगेन में मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा और विरासत को जीवंत करने का प्रयास हुआ। नाटक की कथा जगदीश चौक और गणगौर घाट क्षेत्र में गाइड राजू और रूस से आई शोधार्थी स्वेतलाना के बीच पनपते निश्छल प्रेम पर केंद्रित रही।
नाटक ने एक ओर उदयपुर की झीलों को स्वच्छ और संरक्षित रखने का संदेश दिया तो दूसरी ओर अपनी माटी से भावनात्मक जुड़ाव को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।
साहित्य और रंगकर्म का संगम यह प्रस्तुति फिल्म गाइड को रंगमंचीय श्रद्धांजलि रही। कहानी गौरीकान्त शर्मा द्वारा लिखी गई और रंगमंचीय रूपांतरण व निर्देशन शिवराज सोनवाल द्वारा किया गया। दर्शकों ने इसे एक यादगार अनुभव बताते हुए कहा कि इसने उन्हें उस जादुई एहसास से रूबरू कराया जिसने गाइड को कालजयी बनाया और उदयपुर को विश्व मानचित्र पर स्थापित किया।
कलाकारों का बेजोड़ अभिनय मुख्य पात्र गाइड राजू की भूमिका कुलदीप धाभाई ने निभाई, जिन्होंने अपने अभिनय से किरदार को जीवंत कर दिया। स्वेतलाना के किरदार में यशस्वी श्रीवास्तव और शोना मल्होत्रा ने प्रभावी अभिव्यक्ति से दर्शकों के दिल जीत लिए। अन्य भूमिकाओं में पायल मेनारिया, निखिल सत्संगी (अमी), अमित व्यास, मानस जैन, यश कुमावत, प्रवर खंडेलवाल, सुखदेव राव और प्रद्युम्न शामिल रहे। वस्त्र परिकल्पना रेखा शर्मा की रही, जबकि संगीत डिज़ाइन और लाइव गायन दिविषा घारू द्वारा प्रस्तुत किया गया।
विरासत का पुनर्जीवन जीआर फिनमार्ट के गौतम राठौड़ ने कहा कि गाइड-वन्स अगेन केवल नाट्य प्रस्तुति नहीं बल्कि उदयपुर की आत्मा और सांस्कृतिक विरासत को पुनः जीवंत करने का माध्यम है। यह नई पीढ़ी तक मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा और विरासत को हस्तांतरित करने का कार्य करता है।
नाटक के सफल मंचन ने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया बल्कि उदयपुर की सांस्कृतिक धरोहर को पुनः पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ।



