"माँ के नाम एक पौधा" अभियान में सिकलीगर समाज की महिलाओं ने दिखाई सेवा और संस्कार की नई राह

In the campaign "One Plant in the Name of Mother", women of the Sikligar community showed a new path of service and culture

"माँ के नाम एक पौधा" अभियान में सिकलीगर समाज की महिलाओं ने दिखाई सेवा और संस्कार की नई राह

"माँ के नाम एक पौधा" अभियान में सिकलीगर समाज की महिलाओं ने दिखाई सेवा और संस्कार की नई राह

जावद (नीमच),

आज दिनांक 20 जुलाई 2025 मध्य प्रदेश शहर नीमच गांव जावद मे सिकलीगर समाज की महिलाओं द्वारा पौधारोपण कार्य क्रम

परिवर्तन तब शुरू होता है जब समाज अपने इतिहास को पहचानकर भविष्य की दिशा तय करता है।

ऐसा ही एक भावपूर्ण और प्रेरणादायक दृश्य हाल ही में नीमच जिले के जावद गाँव में देखने को मिला, जहाँ सिकलीगर विरासत विकास सेवा संस्थान के नेतृत्व में "एक पौधा माँ के नाम" अभियान के अंतर्गत पौधारोपण कार्यक्रम संपन्न हुआ।

इस आयोजन में समाज की जागरूक महिलाओं ने न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी निभाई, बल्कि नई पीढ़ी को सेवा, संस्कार और संस्कृति से जोड़ने का भी प्रयास किया। महिलाओं के साथ बच्चों ने भी इस मुहिम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रत्येक पौधा अपनी माँ के नाम समर्पित किया।

कार्यक्रम में हिमानी पिपाड़िया, हनी चौहान और कमला बाईं चौहान जैसी सामाजिक रूप से सक्रिय महिलाओं की सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि सिकलीगर समाज अब केवल अपनी ऐतिहासिक पहचान पर गर्व नहीं कर रहा, बल्कि एक नई सामाजिक चेतना के साथ जागृत होकर संगठित भी हो रहा है।

इसमें

हर्षवर्धन चौहान

जय पीपाडिया 

भाग्यश्री चौहान

दृष्टि चौहान---

नई पीढ़ी ने भी पौधारोपण कर अपनी भागीदारी निभाई

संस्कार से सेवा की ओर – एक बदलते समाज की कहानी

सिकलीगर समाज की यह पहल यह बताती है कि जब महिलाएं नेतृत्व में आती हैं, और जब बच्चे प्रकृति से जुड़ते हैं, तो समाज केवल हरियाली नहीं, संस्कार और सशक्तिकरण भी बोता है।

सिकलीगर विरासत विकास सेवा संस्थान का उद्देश्य समाज में केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि जागरूकता, शिक्षा और संगठन शक्ति की जड़ें गहराई तक स्थापित करना है। इस अभियान के माध्यम से समाज एकजुट होकर अपने भीतर सेवा की संस्कृति और विरासत का गौरव पुनः जागृत कर रहा है।


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संगठन बन रहा है शक्ति का माध्यम

आज यह संस्था केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक सामूहिक संकल्प बनती जा रही है —
जहाँ कोई सदस्य अपने हाथ से पौधा लगाता है,
कोई अपने समय से सेवा करता है,
और कोई अपने विचार से इस आंदोलन को दिशा दे रहा हे।

संस्था का विश्वास है कि विरासत को पुस्तकों में नहीं, जीवन में उतारना होगा, और यह तभी संभव है जब समाज जागे, जुड़े और आगे बढ़े।


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समाज से आह्वान

संस्थान ने सभी समाजबंधुओं, युवाओं और जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान से जुड़ें और "एक पौधा माँ के नाम" समर्पित करें। यह सिर्फ हरियाली का नहीं, बल्कि संस्कार और सेवा का संकल्प है।


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