पशुओं के प्रति व्यवहार से राष्ट्र की महानता तय होती है : गांधी जयंती पर संगोष्ठी | उदयपुर
उदयपुर के राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में गांधी जी की पुण्यतिथि पर संगोष्ठी आयोजित हुई। पशु कल्याण, करुणा, अहिंसा और बकरी पालन पर गांधीजी के विचारों पर चर्चा।
पशुओं के प्रति व्यवहार से ही राष्ट्र की महानता का होता है मूल्यांकन : गांधीजी
उदयपुर, 30 जनवरी।
शहीद दिवस एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर में श्रद्धांजलि सभा एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “गांधीजी का चिंतन – पशुओं के प्रति व्यवहार ही किसी राष्ट्र की महानता का मापदंड है” रहा।
इस अवसर पर संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. सुरेंद्र छंगाणी ने महात्मा गांधी के जीवन दर्शन, सत्य, अहिंसा, करुणा और पशु कल्याण से जुड़े विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गांधीजी केवल मानवता ही नहीं, बल्कि पशु कल्याण और करुणा के भी सच्चे प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि गांधीजी का यह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है कि “किसी देश की महानता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अपने पशुओं के साथ कैसा व्यवहार करता है।”
डॉ. छंगाणी ने बताया कि गांधीजी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए बकरी पालन को एक सशक्त माध्यम बताया था। कम पूंजी में बकरी पालन कर गरीब परिवार अपनी आजीविका मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने बकरी के दूध के पोषण मूल्य पर भी प्रकाश डालते हुए इसके नियमित सेवन की सलाह दी थी।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के विद्यार्थियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने गांधीजी की प्रिय रामधुन “रघुपति राघव राजा राम” तथा भजन “वैष्णव जन तो तेने कहिए” का सामूहिक गायन किया, जिससे वातावरण भावपूर्ण और श्रद्धामय बन गया।
इस अवसर पर डॉ. पद्मा मील ने पशुपालन से संबंधित गांधीजी के विचारों पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि गांधीजी का संपूर्ण जीवन सादगी, नैतिकता और उच्च आदर्शों से प्रेरित रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी पूरी दुनिया गांधीजी द्वारा दी गई अहिंसा और नैतिक मूल्यों की शिक्षा को अपनाने की आवश्यकता महसूस कर रही है।
पशुपालन डिप्लोमा के विद्यार्थियों ने भी संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ओमप्रकाश साहू ने किया और गांधीजी के जीवन एवं योगदान पर विस्तार से जानकारी प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का समापन गांधीजी के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने और पशु कल्याण व करुणा के मूल्यों को समाज में फैलाने के संकल्प के साथ हुआ।




