जेण्डर संवेदनशीलता पर उदयपुर में दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यशाला आयोजित
उदयपुर में महिला अधिकारिता एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में जेंडर संवेदनशीलता विषय पर दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के कार्मिकों ने भाग लिया।
जेण्डर संवेदनशीलता विषय पर दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यशाला आयोजित
उदयपुर, 3 फरवरी।
महिला अधिकारिता विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कालीबाई भील महिला एवं बाल विकास शोध संस्थान द्वारा जेंडर संवेदनशीलता मॉड्यूल पर आधारित दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन हरिशचन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान में किया गया। कार्यशाला परस्पर बातचीत, संवाद और चर्चा आधारित रही।
कार्यशाला में महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक संजय जोशी विशेष रूप से उपस्थित रहे। जतन संस्था के निदेशक डॉ. कैलाश बृजवासी, प्रशिक्षण प्रबंधक मरुधर सिंह तथा प्रशिक्षक देवांश पांडे द्वारा जेंडर संवेदनशीलता विषय पर विस्तृत सत्र लिए गए। वहीं, प्रोफेसर गायत्री तिवारी एवं भूतपूर्व प्रचेता मंजु चौबीसा की गरिमामयी उपस्थिति भी रही।
कार्यशाला का संचालन महिला अधिकारिता विभाग की जेंडर स्पेशलिस्ट विमला वीरवाल द्वारा किया गया। इस दौरान जेंडर संवेदनशीलता की अवधारणा, उद्देश्य और सामाजिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि जेंडर संवेदनशीलता का उद्देश्य समाज में सभी लिंगों—महिला, पुरुष एवं अन्य जेंडर पहचान—के प्रति सम्मान, समानता और समझ को बढ़ावा देना है।
कार्यशाला में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं निर्णय निर्माण की प्रक्रियाओं में समान अवसर सुनिश्चित करने, भेदभाव व रूढ़ियों (स्टिरियोटाइप्स) को कम करने तथा महिलाओं एवं अन्य जेंडर समूहों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की रोकथाम पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही न्यायपूर्ण, सुरक्षित और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में संस्थागत भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों से आए अधिकारी एवं कार्मिकों ने भाग लिया। महिला अधिकारिता विभाग के सुपरवाइजर, ग्राम साथिन, डीएचईडब्ल्यू से मल्टी-टास्किंग स्टाफ, पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान केंद्र के परामर्शदाता तथा महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र के परामर्शदाता कार्यशाला में सहभागी बने।




