पीएम किसान सम्मान निधि में बड़ा घोटाला, 550 की जांच में 533 अपात्र निकले | डूंगरपुर

डूंगरपुर जिले में पीएम किसान सम्मान निधि योजना में बड़ी अनियमितता सामने आई है। सांसद डॉ. मन्नालाल रावत की शिकायत पर 550 लाभार्थियों की जांच में 533 लोग अपात्र पाए गए। कलेक्टर की जांच रिपोर्ट से खुलासा।

पीएम किसान सम्मान निधि में बड़ा घोटाला, 550 की जांच में 533 अपात्र निकले | डूंगरपुर

पीएम किसान सम्मान निधि में बड़ा खुलासा: 550 की जांच में 533 अपात्र पाए गए

डॉ. मन्नालाल रावत की शिकायत पर कार्रवाई, मुख्यमंत्री के निर्देश पर कलेक्टर ने करवाई जांच

उदयपुर/डूंगरपुर।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। डूंगरपुर जिले की कई ग्राम पंचायतों में बड़ी संख्या में अपात्र लोगों को योजना का लाभ दिए जाने का खुलासा हुआ है। सांसद डॉ. मन्नालाल रावत द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भेजी गई शिकायत के बाद करवाई गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

जिला प्रशासन द्वारा करवाई गई जांच में कुल 550 लाभार्थियों की सूची की पड़ताल की गई, जिसमें से 533 लोगों को अपात्र पाया गया, जबकि केवल 17 लाभार्थी ही पात्र निकले। यह जांच मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला कलेक्टर डूंगरपुर द्वारा संबंधित तहसीलदारों के माध्यम से करवाई गई।  

इन पंचायतों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी

सांसद डॉ. रावत ने अपने पत्र में ग्राम पंचायत बारों का शेर, बोलाडरा, बटका फला और गुमानपुरा सहित अन्य पंचायतों में अपात्र लाभार्थियों को योजना में शामिल किए जाने की तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध करवाई थी। जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश अपात्र लाभार्थी डूंगरपुर जिले के मूल निवासी नहीं हैं अथवा उनसे संपर्क संभव नहीं हो सका

जांच के दौरान पालगामड़ी, बारों का शेर, बोलाडरा, मानतफला, बटका फला, मेताली, गुमानपुरा और सेरावाड़ा गांवों में पटवारी और तहसीलदार स्तर पर सत्यापन किया गया, जिसमें अधिकांश लाभार्थी अपात्र पाए गए।

अभी और नाम सामने आने की संभावना

सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले समय में और भी अपात्र लाभार्थियों के नाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने अपात्र लोगों को योजना में शामिल करने की साजिश में शामिल अधिकारियों व अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

यह मामला केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी किसान योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर सख्ती के संकेत भी देता है।