आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर में ईपी लैब शुरू | हार्ट रिदम इलाज को नई तकनीक

आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर में अत्याधुनिक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी (ईपी) लैब का शुभारंभ हुआ। 2डी-3डी मैपिंग तकनीक से हृदय की अनियमित धड़कन का अब सटीक और सुरक्षित इलाज संभव।

आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर में ईपी लैब शुरू | हार्ट रिदम इलाज को नई तकनीक

आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर में इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी लैब का शुभारंभ

हृदय की अनियमित धड़कन के इलाज को मिली नई दिशा

उदयपुर, 20 जनवरी।
दक्षिणी राजस्थान के हृदय रोगियों के लिए एक बड़ी राहत भरी पहल के तहत रविन्द्र नाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज एवं सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, उदयपुर के कार्डियोलॉजी विभाग की कैथलैब में अत्याधुनिक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी (ईपी) स्टडी यूनिट का शुभारंभ किया गया। यह यूनिट नवीनतम 2डी और 3डी मैपिंग तकनीक से सुसज्जित है, जिसमें 3डी तकनीक वाली यह मशीन सम्पूर्ण दक्षिणी राजस्थान में पहली है।

इस अत्याधुनिक ईपी लैब के माध्यम से अब उन मरीजों का सटीक परीक्षण और प्रभावी उपचार संभव हो सकेगा, जिनमें हृदय की धड़कन असामान्य रूप से तेज, धीमी या अनियमित रहती है। ईपी स्टडी तकनीक से हृदय की विद्युत प्रणाली की गहन जांच कर बीमारी के वास्तविक कारण तक पहुंचा जा सकता है, जिससे गंभीर हृदय रोगियों को बेहतर और स्थायी उपचार मिल सकेगा।

डीएमएफटी फंड से 3.5 करोड़ की लागत

शुभारंभ अवसर पर आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. विपिन माथुर ने बताया कि यह सुविधा दक्षिण राजस्थान के हृदय रोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब मरीजों को उन्नत इलाज के लिए बड़े महानगरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि यह ईपी लैब डीएमएफटी फंड से प्राप्त 3.5 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित की गई है।
डॉ. माथुर ने इस अवसर पर जिला कलेक्टर नमित मेहता सहित सभी जनप्रतिनिधियों का महाविद्यालय परिवार की ओर से आभार व्यक्त किया।

हार्ट रिदम डिसऑर्डर के इलाज में होगी क्रांतिकारी सुविधा

कार्यक्रम में कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ आचार्य डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने ईपी स्टडी की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह तकनीक हार्ट रिदम डिसऑर्डर के इलाज में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होगी।
उन्होंने बताया कि ईपी स्टडी एक विशेष जांच प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से हृदय की विद्युत गतिविधियों का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाता है। इसके जरिए असामान्य धड़कनों के सटीक स्थान की पहचान की जाती है, जिसके बाद आरएफ एबलेशन तकनीक द्वारा उस असामान्य विद्युत मार्ग को नियंत्रित किया जाता है, जिससे मरीज को स्थायी राहत मिलती है।

बिना ओपन सर्जरी, सुरक्षित और तेज उपचार

2डी और 3डी मैपिंग तकनीक के उपयोग से हृदय की त्रि-आयामी संरचना को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक सटीक, सुरक्षित और कम समय में पूर्ण होती है। इस आधुनिक तकनीक में ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती और मरीज शीघ्र स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है।

ये रहे उपस्थित गणमान्य

उद्घाटन समारोह में डॉ. अर्चना गोखरू (सह आचार्य), डॉ. दीपक आमेटा (सह आचार्य), डॉ. रविराज (सहायक आचार्य), एसएसबी मेट्रन शारदा गरासिया, कैथलैब प्रभारी राजेश नायर, वरिष्ठ टीए लोहित दीक्षित, अनिल जीनगर, राजेन्द्र सिंह मीणा (वरिष्ठ रेडियोग्राफर) सहित कार्डियोलॉजी विभाग के चिकित्सक, तकनीकी स्टाफ एवं नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहे।