संसद में उदयपुर का मुद्दा: ग्राम सभा में बनेगा विकसित जनजाति ग्राम प्लान, केंद्र ने मानी सांसद डॉ. रावत की बात

सांसद डॉ. मन्नालाल रावत के सुझाव पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला। धरती आबा जनजाति उन्नत ग्राम अभियान के तहत ग्राम सभा में बनेगा विकसित जनजाति ग्राम का प्लान। राजस्थान के 6019 गांवों को होगा लाभ।

संसद में उदयपुर का मुद्दा: ग्राम सभा में बनेगा विकसित जनजाति ग्राम प्लान, केंद्र ने मानी सांसद डॉ. रावत की बात

संसद में गूंजा उदयपुर का सुझाव: ग्राम सभा में बनेगा विकसित जनजाति ग्राम का प्लान, केंद्र सरकार ने मानी सांसद डॉ. मन्नालाल रावत की बात

उदयपुर।
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत अब विकसित भारत की परिकल्पना को ज़मीनी स्तर पर उतारने के लिए प्रत्येक जनजातीय गांव का विकसित ग्राम प्लान सीधे ग्राम सभा में तैयार किया जाएगा। लोकसभा में उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत द्वारा दिए गए इस महत्वपूर्ण सुझाव को भारत सरकार ने स्वीकार कर लिया है

लोकसभा में गुरुवार को सांसद डॉ. रावत द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के दौरान उन्होंने यह सुझाव रखा कि जनजाति उन्नत ग्राम अभियान के अंतर्गत हर गांव की विकास योजना ग्राम सभा में बनाई जाए, जिससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं का क्रियान्वयन हो सके। इस पर जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने सदन में कहा कि सरकार इस सुझाव पर गंभीरता से काम करेगी। वहीं लोकसभा अध्यक्ष एवं जनजातीय कार्य मंत्री दोनों ने इस सुझाव को व्यावहारिक और प्रभावी बताया।

राजस्थान के 6019 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ

केंद्र सरकार द्वारा संचालित धरती आबा जनजाति उन्नत ग्राम अभियान के तहत देशभर के 63,843 जनजातीय बहुल गांवों को कवर किया गया है।
राजस्थान में यह अभियान 30 जिलों के 208 ब्लॉकों के 6019 ग्रामों में चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य भौतिक सुविधाओं और मानव संसाधन विकास में शत-प्रतिशत संतृप्ति हासिल करना है।

2 अक्टूबर 2024 को हुआ था अभियान का शुभारंभ

जनजातीय कार्य मंत्री ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2024 को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) का शुभारंभ किया था। इस महत्वाकांक्षी अभियान में 17 केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा लागू किए जा रहे 25 प्रमुख उपाय शामिल हैं।

अभियान का लक्ष्य स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, आवास, आजीविका, कौशल विकास, संपर्क (कनेक्टिविटी) और सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़ी कमियों को दूर करना है, ताकि जनजातीय समुदायों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।

पांच वर्षों में 79,156 करोड़ रुपये का बजट

इस अभियान के लिए केंद्र और राज्यों द्वारा कुल 79,156 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें

  • केंद्र सरकार का हिस्सा: 56,333 करोड़ रुपये

  • राज्यों का हिस्सा: 22,823 करोड़ रुपये

देशभर के 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों और 2,911 ब्लॉकों में यह योजना लागू की जा रही है।

उदयपुर संभाग में पानी, आवास और कनेक्टिविटी पर खास फोकस

राजस्थान सरकार के प्रस्तावों के आधार पर उदयपुर, सलूंबर, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों में अभियान के तहत कई कार्य स्वीकृत किए गए हैं।

  • पेयजल: 2038 गांवों में से 1850 गांवों को पेयजल आपूर्ति से संतृप्त किया गया

  • आवास:

    • डूंगरपुर – 6076 आवास

    • प्रतापगढ़ – 2793 आवास

    • सलूंबर – 9092 आवास

    • उदयपुर – 2218 आवास

  • मोबाइल कनेक्टिविटी:

    • डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों के कुल 162 गांवों में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराया गया

ग्राम सभा को मिलेगी निर्णायक भूमिका

सांसद डॉ. मन्नालाल रावत के सुझाव के स्वीकार होने से अब जनजातीय गांवों में विकास योजनाओं की सीधी भागीदारी ग्राम सभा की होगी, जिससे योजनाएं ज़मीनी जरूरतों के अनुरूप बनेंगी और उनका प्रभाव भी अधिक होगा।

यह निर्णय न केवल जनजातीय क्षेत्रों के विकास को गति देगा, बल्कि विकसित भारत के संकल्प में उदयपुर की भूमिका को राष्ट्रीय मंच पर और मजबूत करेगा