शिल्पग्राम उत्सव 2025: गोटीपुआ नृत्य ने भक्ति और एक्रोबेट से रिझाया शिल्पग्राम | Udaipur News
शिल्पग्राम उत्सव 2025 के पांचवें दिन ओडिशा के गोटीपुआ नृत्य ने भक्ति, सौंदर्य और रोमांच का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। देशभर की लोक प्रस्तुतियों ने ‘लोक के रंग-लोक के संग’ थीम को जीवंत किया।
शिल्पग्राम उत्सव-2025 में गोटीपुआ नृत्य ने रचा भक्ति और रोमांच का अद्भुत संगम
‘लोक के रंग-लोक के संग’ थीम को जीवंत करतीं देशभर की लोक प्रस्तुतियां
उदयपुर, 25 दिसंबर।

शिल्पग्राम उत्सव-2025 के पांचवें दिन गुरुवार की शाम भक्ति, सौंदर्य और साहस के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। ओडिशा के पारंपरिक गोटीपुआ नृत्य ने मुक्ताकाशी मंच पर ऐसी छटा बिखेरी कि पूरा शिल्पग्राम तालियों की गूंज से भर उठा। नारी वेश धारण किए बाल नर्तकों द्वारा प्रस्तुत यह नृत्य भगवान जगन्नाथ को समर्पित था, जिसमें आध्यात्मिक भाव, लयबद्ध नृत्य और रोमांचक एक्रोबेटिक करतबों का अनूठा समावेश देखने को मिला।

दर्शक पहले तो नृत्य की नजाकत और भाव-भंगिमाओं में खो गए, लेकिन जब यह रहस्य खुला कि ये सभी कलाकार पुरुष हैं, तो हर कोई हैरान रह गया। नृत्य के दौरान बनाए गए मानव पिरामिड और संतुलन के कठिन करतबों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर द्वारा आयोजित दस दिवसीय शिल्पग्राम उत्सव के अंतर्गत प्रस्तुत इस सांस्कृतिक संध्या में देश के विभिन्न राज्यों की लोक प्रस्तुतियों ने ‘लोक के रंग-लोक के संग’ थीम को पूरी तरह साकार किया। गुजरात का गरबा, जम्मू का डोगरी लोक नृत्य जगरना, राजस्थान का सहरिया स्वांग और सफेद आंगी गेर, गोवा का देखनी नृत्य, त्रिपुरा का संतुलन आधारित होजागिरी, ओडिशा का संभलपुरी नृत्य और महाराष्ट्र का मल्लखंभ दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे।

इसके अलावा हरियाणा की घूमर, राजस्थान के लोकदेवता गोगाजी को समर्पित डेरू नृत्य, पश्चिम बंगाल का नटुआ लोक नृत्य, छत्तीसगढ़ की पंडवानी कथा, मणिपुर का थांगटा-स्टिक और राजस्थान के बीन-जोगी जैसे लोक रूपों ने भी सांस्कृतिक वैभव को और समृद्ध किया। हर प्रस्तुति पर दर्शकों की उत्साहपूर्ण तालियां कलाकारों का उत्साह बढ़ाती रहीं। कार्यक्रम का संचालन दुर्गेश चांदवानी और मोहिता दीक्षित ने किया।
‘हिवड़ा री हूक’ में उभरती प्रतिभाएं

बंजारा मंच पर आयोजित ‘हिवड़ा री हूक’ कार्यक्रम के पांचवें दिन भी मेलार्थियों की भागीदारी देखने लायक रही। दर्शकों ने गायन, कविता पाठ और अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। को-ऑर्डिनेटर सौरभ भट्ट द्वारा आयोजित प्रश्नोत्तरी में सभी आयुवर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, वहीं सही उत्तर देने वालों को आकर्षक उपहार भी प्रदान किए गए।
थड़ों पर दिनभर लोक रंजन

शिल्पग्राम उत्सव में विभिन्न थड़ों पर सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक लगातार लोक प्रस्तुतियों का सिलसिला चलता रहा। कच्ची घोड़ी, गवरी, गरबा, बाजीगर, मांगणियार गायन, गोंधल, घूमट, कठपुतली, चकरी, सुंदरी और बहरूपिया कलाकारों ने मेलार्थियों का भरपूर मनोरंजन किया। वहीं शिल्पग्राम परिसर में स्थापित पत्थर की मूर्तियां लोगों के लिए आकर्षण और पसंदीदा सेल्फी पॉइंट बनी रहीं।
शिल्पग्राम उत्सव-2025 की यह सांस्कृतिक संध्या भारतीय लोक परंपराओं की विविधता, जीवंतता और समृद्ध विरासत का भव्य प्रदर्शन साबित हुई, जिसने हर आयु वर्ग के दर्शकों को लोक संस्कृति से जोड़ दिया।



