सिकल सेल उन्मूलन के लिए जन्म पर रोक जरूरी, तभी सफल होगा मिशन 2047 : डॉ. सुमन
सिकल सेल जैसी खतरनाक अनुवांशिक बीमारी को खत्म करने के लिए जन्म पर रोक सबसे अहम कदम है। दिल्ली में राष्ट्रीय मीट में डॉ. सुमन ने मिशन 2047 को सफल बनाने पर जोर दिया।
सिकल सेल उन्मूलन के लिए जन्म पर रोक ही सबसे बड़ा उपाय, तभी सफल होगा मिशन 2047 : डॉ. सुमन
नई दिल्ली/उदयपुर।
सिकल सेल रोग एक गंभीर और आजीवन पीड़ा देने वाली अनुवांशिक रक्त विकार बीमारी है, जिससे पीड़ित मरीज को बार-बार असहनीय दर्द, खून चढ़ाने की आवश्यकता और कई बार जानलेवा जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। स्ट्रोक, पीलिया, पथरी, अटैक जैसी समस्याएं इस बीमारी को और भी खतरनाक बना देती हैं। इसे जड़ से समाप्त करने के लिए भारत सरकार द्वारा मिशन 2047 – सिकल सेल एलिमिनेशन शुरू किया गया है, लेकिन इस मिशन की सफलता के लिए सिकल सेल से पीड़ित बच्चों के जन्म पर रोक लगाना सबसे अहम कदम है।

यह बात महाराणा भूपाल चिकित्सालय, उदयपुर की अधीक्षक डॉ. सुमन ने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सिकल सेल एलायंस की नेशनल मीट में पुरजोर तरीके से कही। उन्होंने कहा कि जब तक सिकल सेल बीमारी के जन्म को नहीं रोका जाएगा, तब तक मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती रहेगी और मिशन 2047 का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।
डॉ. सुमन ने उदयपुर स्थित सिकल सेल सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस के अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रतिदिन नए सिकल सेल मरीजों की पहचान हो रही है और उन्हें रजिस्ट्री में जोड़ा जा रहा है। यह सकारात्मक पहल है कि मरीजों को समय पर दवा, निगरानी और इलाज मिल रहा है, लेकिन साथ-साथ यह भी जरूरी है कि नए सिकल सेल बच्चों के जन्म को रोका जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि जब आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक डिलीवरी अस्पतालों में हो रही हैं, तो प्री-नेटल और एंटी-नेटल सिकल सेल जांच को अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे संभावित सिकल सेल पीड़ित बच्चों की पहचान गर्भावस्था के दौरान ही हो सकेगी। आवश्यकता पड़ने पर बड़े अस्पतालों में गर्भस्थ शिशु की जांच की सुविधा भी उपलब्ध है या कराई जा सकती है।
डॉ. सुमन ने कहा कि मिशन के तहत स्क्रीनिंग, पहचान, इलाज और प्रिवेंशन सभी गतिविधियां तय हैं, लेकिन जब तक जन्म पर रोक नहीं लगेगी, तब तक यह अभियान अधूरा रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज पैदा हो रहे सिकल सेल बच्चों के भविष्य की पीढ़ियों को इस बीमारी से मुक्त रखना ही मिशन 2047 की असली सफलता होगी।

उन्होंने बताया कि प्री-नेटल, एंटी-नेटल और न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग को लगातार लागू करके ही हर सिकल सेल मरीज की पहचान संभव है और उन्हें समय पर समुचित इलाज मिल सकता है।
इस नेशनल मीट में देशभर से सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के विशेषज्ञ शामिल हुए। उदयपुर से डॉ. सुमन के साथ ललित पारगी, जो सेंटर के नर्सिंग इंचार्ज हैं और स्वयं सिकल सेल वॉरियर भी हैं, ने भाग लिया।
गौरतलब है कि महाराणा भूपाल अस्पताल स्थित बाल चिकित्सालय में भारत सरकार द्वारा दिसंबर 2024 से सिकल सेल सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस संचालित किया जा रहा है। यह सेंटर न केवल उदयपुर संभाग बल्कि राजस्थान के सभी आदिवासी जिलों के मरीजों को सेवाएं दे रहा है। यहां स्क्रीनिंग, पहचान, इलाज, रिहैबिलिटेशन और भर्ती की सुविधा सभी आयु वर्ग के मरीजों के लिए उपलब्ध है।
पिछले एक वर्ष में इस सेंटर के माध्यम से 197 मरीजों को इलाज देकर लाभान्वित किया गया, जबकि 600 से अधिक मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है। सिकल सेल स्क्रीनिंग की प्रक्रिया लगातार जारी है।




