उदयपुर में नगर निगम की सामाजिक समरसता रैली | जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा कार्यक्रम
उदयपुर में जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा के तहत नगर निगम द्वारा सामाजिक समरसता रैली निकाली गई। कर्मचारियों ने बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्रीय एकता एवं आदिवासी गौरव का संदेश दिया। विभिन्न मार्गों पर नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता दिखाई।
उदयपुर में निकली सामाजिक समरसता रैली, बिरसा मुंडा के आदर्शों से गूंजा शहर
उदयपुर, 15 नवम्बर। जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा के अंतर्गत नगर निगम उदयपुर द्वारा शहर के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय एकता का संदेश देने के लिए भव्य रैलियों का आयोजन किया गया। इन रैलियों में आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प प्रमुख रूप से दिखाई दिया।
नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा सामाजिक जागरण, जनअधिकारों और स्वतंत्रता संघर्ष के अमर प्रतीक रहे हैं। उनकी जयंती को निगम कर्मचारियों द्वारा प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया गया। आयुक्त ने कहा कि बिरसा मुंडा के संघर्ष और आदर्श भारत की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी हैं, इसलिए इस संदेश को पूरे समाज तक पहुँचाने का विशेष प्रयास किया गया।

रैली के दौरान कर्मचारियों ने “बिरसा मुंडा अमर रहें” और “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारों के साथ शहरवासियों को राष्ट्रप्रेम और एकता का संदेश दिया। कई स्थानों पर स्थानीय नागरिक भी उत्साहपूर्वक रैली में शामिल हुए और आदिवासी गौरव की इस भावना को और मजबूत किया।
शहर के विभिन्न मार्गों से निकली रैलियाँ
रैलियाँ पाँच प्रमुख मार्गों से निकाली गईं—
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सूरजपोल से बापू बाज़ार होते हुए देहली गेट
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हाथीपोल से अश्विनी बाज़ार होते हुए देहली गेट
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100 फीट रोड आयड पुलिया से बेकनी पुलिया
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गोवर्धन विलास चुंगी नाका से सीए सर्कल होकर पुनः चुंगी नाका
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नारायण सेवा रोड से चार अलग मार्गों पर अनुशासित रैली
प्रत्येक स्थान पर नगर निगम कर्मचारियों ने भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शांतिपूर्ण और अनुशासित रूप से मार्च किया।
अधिकारियों की उपस्थिति से बढ़ा उत्साह
इस अवसर पर उपायुक्त दिनेश मंडोवरा, स्वास्थ्य अधिकारी सत्यनारायण शर्मा, स्वास्थ्य निरीक्षक नरेंद्र श्रीमाली, सुभाष चंद्र शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।
नगर निगम की इस पहल ने शहर में सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और आदिवासी वीरों के योगदान को सम्मान देने का सशक्त संदेश दिया।



