एवरेस्ट फतह करने वाली उदयपुर की बेटी मनस्वी का नागरिक अभिनंदन

Civic reception for Manasvi, Udaipur's daughter who conquered Everest.

एवरेस्ट विजेता मनस्वी का नागरिक सम्मान

स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री से राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं उदयपुर की बेटी

उदयपुर, 25 अगस्त। विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर इतिहास रचने वाली उदयपुर की बेटी मनस्वी अग्रवाल का मंगलवार को नागरिक अभिनंदन किया गया। सुकृत न्यास की ओर से शहर के एक होटल में आयोजित सम्मान समारोह में सांसद डॉ. मन्नालाल रावत सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों ने मनस्वी का सम्मान कर उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की।

मनस्वी अग्रवाल हाल ही में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली राजस्थान की पहली गैर-सैन्य एवं गैर-राजकीय क्षेत्र की महिला पर्वतारोही बनी हैं। उनकी इस असाधारण उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी बीकानेर में आयोजित राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में उन्हें सम्मानित किया था।

समारोह में सुकृत न्यास के मनोज जोशी, डॉ. विवेक भटनागर सहित बड़ी संख्या में शहरवासी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

21 मई को एवरेस्ट पर लहराया तिरंगा

मनस्वी ने 21 मई 2026 को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर भारतीय तिरंगा फहराकर नया इतिहास रचा। उनकी उपलब्धि केवल एवरेस्ट तक सीमित नहीं है। उन्होंने मात्र 9 माह की अल्प अवधि में विश्व के सात महाद्वीपों में से पांच महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर भारतीय ध्वज फहराकर राजस्थान का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।

मनस्वी के पिता टी.आर. अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने 12 दिसंबर 2025 को अंटार्कटिका महाद्वीप के सर्वोच्च शिखर माउंट विन्सन मैसिफ को भी फतह किया। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह राजस्थान की पहली पर्वतारोही हैं और इस चोटी पर अभी तक प्रदेश के किसी अन्य व्यक्ति के आरोहण का उल्लेख नहीं है।

इससे पूर्व मनस्वी ने—

  • 16 अगस्त 2025 को यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एलब्रुस
  • 9 सितम्बर 2025 को अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी किलीमंजारो
  • 22 जनवरी 2026 को दक्षिण अमेरिका की सर्वोच्च चोटी माउंट अकोनकागुआ

पर भारतीय तिरंगा फहराया। इस प्रकार वह विश्व के पांच महाद्वीपों के सर्वोच्च शिखरों पर तिरंगा फहराने वाली राजस्थान की प्रथम महिला पर्वतारोही बन गई हैं।

तीन माह तक लिया कठिन पर्वतारोहण प्रशिक्षण

मनस्वी ने बताया कि विश्व की सर्वोच्च चोटियों पर पर्वतारोहण के लिए उन्होंने घर से दूर रहकर लगातार तीन माह तक हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लेह-लद्दाख और नेपाल के ऊंचे एवं बर्फीले पर्वतीय क्षेत्रों में गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।

उन्होंने बताया कि माउंट एवरेस्ट जैसे दुर्गम शिखर पर चढ़ाई के लिए तकनीकी दक्षता के साथ उच्च स्तरीय शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता की आवश्यकता होती है। इन पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान माइनस 45 से माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, वहीं पर्वतारोहियों को 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली बर्फीली हवाओं का भी सामना करना पड़ता है।

भारतीय सेना के संस्थानों से प्राप्त किया प्रशिक्षण

मनस्वी अग्रवाल ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में कठोर एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट, दिरांग तथा हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट से बेसिक एवं एडवांस पर्वतारोहण प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया है।

इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान पर्वतारोहियों को लगभग एक माह तक 6500 मीटर तक की ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों में रहकर अभ्यास कराया जाता है। इसके अतिरिक्त मनस्वी ने स्वामी विवेकानंद रॉक क्लाइम्बिंग संस्थान से भी गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रमाणित प्रशिक्षण हासिल किया है।

शूटिंग की बेहतरीन खिलाड़ी और प्रतिभावान विद्यार्थी भी हैं मनस्वी

मनस्वी केवल पर्वतारोहण में ही नहीं, बल्कि खेल और शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुकी हैं। वह 10 मीटर राइफल शूटिंग में राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय दल के चयन की प्रक्रिया के चार चरण पूर्ण कर चुकी हैं।

उन्होंने गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से पांच वर्षीय विधि अध्ययन पूर्ण किया है और वर्तमान में पर्यावरणीय कानून के क्षेत्र में शोध कार्य कर रही हैं। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित सहायक आचार्य पात्रता परीक्षा में 99.2 परसेंटाइल के साथ सफलता प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक प्रतिभा का भी परिचय दिया है।

उदयपुर की बेटी मनस्वी अग्रवाल की यह उपलब्धि आज प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है। साहस, अनुशासन, कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि बुलंद हौसलों के सामने दुनिया की सबसे ऊंची चोटियां भी छोटी पड़ जाती हैं।