स्माईल उदयपुर अभियान को मिला जनसमर्थन, 500 से अधिक प्रतिष्ठान बाल श्रम मुक्त घोषित

उदयपुर में जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे स्माईल उदयपुर अभियान को आमजन का व्यापक सहयोग मिला। 500 से अधिक दुकानों ने बाल श्रम व बाल भिक्षावृत्ति मुक्त प्रतिष्ठान घोषित होने की शपथ ली।

स्माईल उदयपुर अभियान को मिला जनसमर्थन, 500 से अधिक प्रतिष्ठान बाल श्रम मुक्त घोषित

स्माईल उदयपुर अभियान को मिला आमजन का व्यापक सहयोग, 500 से अधिक प्रतिष्ठान बाल श्रम व भिक्षावृत्ति मुक्त घोषित

उदयपुर, 7 जनवरी।
पर्यटन नगरी उदयपुर को बाल श्रम एवं बाल भिक्षावृत्ति से मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन के नेतृत्व में चलाए जा रहे “स्माईल उदयपुर” अभियान को आमजन का भरपूर सहयोग मिल रहा है। शहर के दुकानदारों, व्यापारियों और सामाजिक संस्थाओं ने अभियान का समर्थन करते हुए अपने प्रतिष्ठानों को बाल श्रम एवं बाल भिक्षावृत्ति मुक्त प्रतिष्ठान घोषित किया है।

जिला कलक्टर नमित मेहता के निर्देशन में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, बाल अधिकारिता विभाग उदयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में यह अभियान 1 जनवरी से 31 मार्च तक संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत जनवरी के प्रथम सप्ताह में शहर के प्रमुख पर्यटक स्थलों, धार्मिक स्थलों एवं मंदिर क्षेत्रों में विशेष जनजागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की गईं।

इस दौरान बाल अधिकारिता विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन, मानव तस्करी विरोधी यूनिट तथा विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों—बाल सुरक्षा नेटवर्क, गायत्री सेवा संस्थान, आजीविका ब्यूरो, महिला सुरक्षा अनुसंधान केंद्र सहित अन्य एनजीओ के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा व्यापक स्तर पर अभियान चलाया गया।

स्माईल उदयपुर अभियान के नोडल अधिकारी एवं सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग के.के. चन्द्रवंशी ने बताया कि 1 से 7 जनवरी के बीच उदयपुर शहर के 500 से अधिक दुकानदारों एवं प्रतिष्ठान संचालकों ने स्वेच्छा से अभियान में भाग लेते हुए अपने प्रतिष्ठानों पर विभाग द्वारा जारी बाल श्रम व बाल भिक्षावृत्ति मुक्त प्रतिष्ठान के स्टीकर चस्पा किए तथा शपथ पत्र भी भरे। इसके साथ ही प्रमुख चौराहों एवं सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर, बैनर और स्टीकर लगाकर आमजन को बाल अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।

अभियान के दौरान बाल अधिकारिता विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन एवं एनजीओ के रेस्क्यू दल द्वारा की गई कार्यवाही का जियो-टैगिंग के माध्यम से दस्तावेजीकरण भी किया गया।

इस अवसर पर राजस्थान राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य के.के. कुमार कविया, बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक के.के. चन्द्रवंशी, बाल संरक्षण अधिकारी राजकुमार जीनगर, मानव तस्करी विरोधी यूनिट की रेखा मीणा, चाइल्ड हेल्पलाइन जिला समन्वयक नवनीत औदीच्य सहित उनकी टीम, बाल सुरक्षा नेटवर्क के संयोजक बी.के. गुप्ता, गायत्री सेवा संस्थान के कार्यक्रम समन्वयक नीतिन पालीवाल, पायल कनेरिया, विवेक, प्रसा अनुसंधान संस्था से मंजरी गुप्ता, श्वेता जोशी एवं आजीविका ब्यूरो से पंकज सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे बाल श्रम एवं बाल भिक्षावृत्ति के विरुद्ध इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें, ताकि उदयपुर को एक सुरक्षित, संवेदनशील और बाल-अधिकारों के प्रति जागरूक शहर बनाया जा सके।