डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की पीएम नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट, मेवाड़ की गौरवशाली विरासत पर चर्चा

मेवाड़ पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने सपरिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद भवन में शिष्टाचार भेंट की। मेवाड़ के इतिहास, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक विरासत पर विस्तृत चर्चा हुई।

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की पीएम नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट, मेवाड़ की गौरवशाली विरासत पर चर्चा

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने सपरिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की शिष्टाचार भेंट, मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा पर हुई सार्थक चर्चा

उदयपुर/नई दिल्ली।
मेवाड़ पूर्व राजपरिवार के सदस्य एवं वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के वंशज डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने मंगलवार को सपरिवार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली स्थित संसद भवन में शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात आधे घंटे से अधिक समय तक चली, जिसमें मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास, राष्ट्रभक्ति और आदर्श जीवन मूल्यों पर सार्थक चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के बीच हुई बातचीत में बप्पा रावल से लेकर महाराणा सांगा और महाराणा प्रताप जैसे महापुरुषों की राष्ट्रनिष्ठा, त्याग और बलिदान को भारत की सांस्कृतिक धरोहर और प्रेरणापथ के रूप में रेखांकित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने मेवाड़ की ऐतिहासिक परंपराओं और उनके राष्ट्रीय महत्व पर गहरी रुचि व्यक्त की। 

इस अवसर पर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उदयपुर स्थित मेवाड़ राजमहल आने का औपचारिक आमंत्रण दिया, जिस पर प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मीयता प्रकट करते हुए सकारात्मक भाव व्यक्त किए।

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक स्तर पर स्थापित हो रही नई पहचान, सशक्त शासन और प्रगतिशील राष्ट्र निर्माण के लिए शुभकामनाएं एवं साधुवाद प्रेषित किए।

इस शिष्टाचार भेंट के दौरान डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के साथ उनके ससुर कनकवर्धन सिंह देव (उड़ीसा सरकार में उपमुख्यमंत्री एवं पटना-बालांगीर रियासत के महाराजा), सासू माँ एवं भाजपा की पांच बार सांसद संगीता कुमारी सिंह देव, पत्नी निवृत्ति कुमारी मेवाड़, सुपुत्र हरितराज सिंह मेवाड़, सुपुत्री मोहलक्षिका कुमारी मेवाड़ तथा प्राणेश्वरी कुमारी मेवाड़ भी उपस्थित रहे।

यह भेंट न केवल ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक भारत के नेतृत्व के बीच संवाद का प्रतीक रही, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के साझा दृष्टिकोण को भी सुदृढ़ करती दिखाई दी।