68 वर्ष की उम्र में एमए फाइनल की परीक्षा देने पहुंचे विधायक फूलसिंह मीणा | बेटियों से मिली शिक्षा की प्रेरणा

उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने 68 वर्ष की उम्र में एमए फाइनल की परीक्षा देकर मिसाल कायम की। बेटियों से प्रेरणा लेकर शिक्षा की राह पर लौटे विधायक आज बालिका शिक्षा के प्रेरणास्त्रोत बने।

68 वर्ष की उम्र में एमए फाइनल की परीक्षा देने पहुंचे विधायक फूलसिंह मीणा | बेटियों से मिली शिक्षा की प्रेरणा

बेटियों से मिली प्रेरणा, 68 वर्ष की उम्र में एमए फाइनल की परीक्षा देने पहुंचे विधायक फूलसिंह मीणा

उदयपुर ग्रामीण विधायक का शिक्षा के प्रति अनूठा जज्बा बना देशभर के शिक्षार्थियों के लिए मिसाल

उदयपुर, 14 जनवरी।
उदयपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार निर्वाचित विधायक फूलसिंह मीणा ने यह सिद्ध कर दिया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। आर्थिक अभावों के कारण 15 वर्ष की उम्र में पढ़ाई छोड़ने वाले विधायक मीणा ने करीब 40 वर्ष बाद दोबारा शिक्षा की राह पकड़ते हुए 68 वर्ष की आयु में एमए राजनीति विज्ञान (अंतिम वर्ष) की परीक्षा देकर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। 

जनजाति परिवार से आने वाले विधायक फूलसिंह मीणा ने बताया कि उन्हें दोबारा पढ़ाई शुरू करने की प्रेरणा उनकी बेटियों से मिली। बेटियों के प्रोत्साहन ने न केवल उन्हें फिर से शिक्षा से जोड़ा, बल्कि आज वे पूरे क्षेत्र की बेटियों के लिए शिक्षा का सबसे बड़ा प्रेरणास्त्रोत बनकर उभरे हैं। 

40 साल बाद फिर थामा शिक्षा का दामन

विधायक मीणा ने बताया कि आर्थिक परिस्थितियों और संघर्षों के कारण उन्हें किशोरावस्था में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। वर्षों बाद, 55 वर्ष की आयु में उन्होंने बीए की परीक्षा उत्तीर्ण की और इसके बाद एमए करने का निर्णय लिया। हाल ही में उन्होंने जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए अंतिम वर्ष की परीक्षा दी। उनका सपना है कि वे पीएचडी पूरी कर “डॉ. फूलसिंह मीणा” बनें और यह उपलब्धि अपने सैनिक पिता को समर्पित करें।

राजनीति और पढ़ाई—दोनों में संतुलन

विधायक मीणा अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों के लिए भी जाने जाते हैं। वे जनता के बीच लगातार सक्रिय रहते हुए क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में जुटे रहते हैं। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सर्वाधिक प्रश्न पूछने वाले विधायकों में उनका नाम शुमार है। इसके बावजूद वे शिक्षा के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहे, जो उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

उल्लेखनीय है कि विधायक मीणा विधानसभा के स्पीकर पैनल के सदस्य हैं और लगातार दूसरी बार जनजाति कल्याण समिति के सभापति भी रह चुके हैं। साथ ही वे आरएससीईआरटी की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य भी हैं।

कार में भी चलती रहती है पढ़ाई

विधायक की शिक्षा में सहयोगी रहे प्राचार्य संजय लुणावत ने बताया कि विधायक मीणा अत्यंत व्यस्त दिनचर्या के बावजूद अध्ययन के प्रति समर्पित रहते हैं। वे क्षेत्र भ्रमण के दौरान कार में ऑडियो लेक्चर सुनते हैं और नोट्स पढ़ते हुए पढ़ाई जारी रखते हैं। शिक्षा के प्रति उनका जोश और जुनून वाकई अनुकरणीय है। 

बालिका शिक्षा के बने प्रेरणापूंज

अपनी बेटियों से प्रेरित होकर शिक्षा की ओर लौटे विधायक मीणा आज क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणापूंज बन चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ योजना से प्रेरित होकर उन्होंने एक अनूठी पहल शुरू की है। इसके तहत वे हर वर्ष अपने विधानसभा क्षेत्र की प्रत्येक पंचायत और वार्ड से कक्षा 10वीं और 12वीं में सर्वाधिक अंक लाने वाली छात्राओं को निःशुल्क हवाई यात्रा कराते हैं।

इस पहल से न केवल बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिला है, बल्कि क्षेत्र में बाल विवाह की घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी आई है। 

पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत

राधास्वामी सत्संग के अनुयायी एवं बाबाजी गुरिंदर सिंह जी ढिल्लों के शिष्य विधायक फूलसिंह मीणा अपनी सादगी, फिटनेस और अनुशासित जीवनशैली के लिए भी पहचाने जाते हैं। शिक्षा के प्रति उनका यह जज्बा न केवल जनप्रतिनिधियों बल्कि देशभर के विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश देता है—सीखने की कोई उम्र नहीं होती।