शिल्पग्राम उत्सव-2025: बंगाल के राय बेंसे नृत्य ने बिखेरा शौर्य और लोक संस्कृति का रंग

शिल्पग्राम उत्सव-2025 में बंगाल के राय बेंसे लोक नृत्य सहित देशभर की लोक कलाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। मुक्ताकाशी मंच पर लोक संस्कृति का भव्य संगम।

शिल्पग्राम उत्सव-2025: बंगाल के राय बेंसे नृत्य ने बिखेरा शौर्य और लोक संस्कृति का रंग

शिल्पग्राम उत्सव-2025 में लोक संस्कृति का महासंगम

बंगाल के राय बेंसे नृत्य ने बिखेरा शौर्य और कौशल का जादू

उदयपुर।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से आयोजित दस दिवसीय शिल्पग्राम उत्सव-2025 में शुक्रवार की शाम लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर रही। खचाखच भरे मुक्ताकाशी मंच पर जैसे ही पश्चिम बंगाल के पारंपरिक राय बेंसे लोक नृत्य की प्रस्तुति शुरू हुई, दर्शकों में रोमांच और ऊर्जा की लहर दौड़ गई। 

राय बेंसे नृत्य, जो मुख्य रूप से बंगाल के बीरभूम, बर्धमान और मुर्शिदाबाद जिलों में प्रचलित है, अपने युद्ध कौशल, शौर्य और एक्रोबेटिक करतबों के लिए जाना जाता है। केवल पुरुष कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इस नृत्य में ताकत, तालमेल और जोश का ऐसा संगम देखने को मिला कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। मंच पर साकार होती वीरता और अनुशासन ने तालियों की गूंज से पूरा परिसर भर दिया।

इसी क्रम में बंगाल के ही नटुआ नृत्य की प्रस्तुति ने मार्शल आर्ट आधारित नृत्य शैली से दर्शकों को खूब प्रभावित किया। कलाकारों की फुर्ती और युद्धाभ्यास ने कार्यक्रम को और भी रोमांचक बना दिया।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज क्षेत्र से आई ढेड़िया लोक नृत्य की प्रस्तुति में नर्तकियों ने सिर पर मिट्टी का घड़ा (दीया) रखकर अद्भुत संतुलन का प्रदर्शन किया। गीत और नृत्य के लयबद्ध सामंजस्य ने यूपी की लोक संस्कृति से दर्शकों को रूबरू कराया और तालियों की गड़गड़ाहट से मंच गूंज उठा।

इस शाम की हर प्रस्तुति उत्सव की थीम ‘लोक के रंग–लोक के संग’ पर पूरी तरह खरी उतरी। जम्मू के पारंपरिक डोगरी लोक नृत्य जगरना, राजस्थान की सहरिया आदिवासी संस्कृति का सहरिया स्वांग डांस और सफेद आंगी गेर ने दर्शकों का मन मोह लिया। उत्तराखंड का छेड़छाड़ भरा छापेली नृत्य हो या गोवा का दीपक (समई) संतुलन वाला लोक नृत्य—हर प्रस्तुति ने अपनी अलग छाप छोड़ी। 

त्रिपुरा के होजागिरी नृत्य में सिर पर बोतल रखकर किया गया अद्भुत बैलेंसिंग दर्शकों को हैरान कर गया। महाराष्ट्र का मल्लखंभ, मणिपुर की मार्शल आर्ट आधारित थांग-ता, और छत्तीसगढ़ की पंडवानी ज्ञान प्रस्तुति ने आध्यात्म और उत्साह का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन मोहिता दीक्षित और यश दीक्षित ने किया।

‘हिवड़ा री हूक’ में दिखी आमजन की प्रतिभा

शिल्पग्राम उत्सव के बंजारा मंच पर चल रहे लोकप्रिय कार्यक्रम ‘हिवड़ा री हूक’ के छठे दिन भी मेलार्थियों ने गायन, कविता और अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। को-ऑर्डिनेटर सौरभ भट्ट की रोचक प्रश्नोत्तरी ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए, वहीं सही उत्तर देने वालों को मौके पर ही उपहार देकर उत्साह बढ़ाया गया। 

थड़ों पर दिनभर लोक रंजन

शिल्पग्राम परिसर में विभिन्न थड़ों पर सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक निरंतर लोक प्रस्तुतियों का दौर जारी रहा। आदिवासी गेर, मीणा जनजाति का घूघरा-छतरी, तेरहताली, भवई, मांगणियार, कठपुतली, बाजीगर, बहरूपिया और विभिन्न लोक कथाओं ने मेलार्थियों का भरपूर मनोरंजन किया। परिसर में स्थापित पत्थर की मूर्तियां, खूबसूरत झोपड़ियां और पारंपरिक संरचनाएं दर्शकों के लिए पसंदीदा सेल्फी पॉइंट बन गई हैं।

आज की शाम के विशेष आकर्षण

शनिवार शाम मुक्ताकाशी मंच पर गुजरात का धमाकेदार सिद्धि धमाल डांस, असम का बिहू, राजस्थान का कालबेलिया, सिक्किम का सिंघी छम, तमिलनाडु का कावड़ी कड़गम, पंजाब का भांगड़ा, ओडिशा का गोटीपुआ सहित शास्त्रीय और लोक वाद्ययंत्रों पर आधारित प्रस्तुतियां दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी।

शिल्पग्राम उत्सव-2025 लोक संस्कृति, परंपरा और विविधता का जीवंत उत्सव बनकर हर आयु वर्ग के दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।