आदिनाथ महिला महाविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी | NEP 2020 पर हुआ मंथन, उदयपुर
उदयपुर के आदिनाथ महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 : एक प्रतिबिंब” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित, 160 शोधार्थियों व शिक्षाविदों ने लिया भाग।
आदिनाथ महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
“राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 : एक प्रतिबिंब” विषय पर हुआ मंथन
उदयपुर, 8 फरवरी।
आदिनाथ महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, उदयपुर में शनिवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 : एक प्रतिबिंब” रहा, जिसमें देशभर से शिक्षाविदों, शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की संयोजिका एवं सचिव डॉ. रितु भटनागर रहीं। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी में विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से आए लगभग 160 शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विविध आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया।

उद्घाटन सत्र में रहे प्रतिष्ठित शिक्षाविद उपस्थित
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. अनुज भटनागर, डिप्टी कमिश्नर, एसजीएसटी विभाग, उदयपुर रहे। वहीं बीज वक्ता प्रो. ए.बी. फाटक, प्रख्यात शिक्षाविद रहे।
अध्यक्षता डॉ. हरि सिंह कंठालिया, संस्थापक, आदिनाथ शिक्षा समिति ने की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. दिग्विजय भटनागर, चेयरमैन, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी संकाय, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त सलाहकार समिति के सदस्यों में प्रो. एम.पी. शर्मा, प्रो. दिव्या प्रभा नगर, डॉ. मनोज दाधीच एवं प्रो. डी.एन. दानी जैसे वरिष्ठ शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्राचीन ज्ञान परंपरा पर शोध की आवश्यकता
बीज वक्ता प्रो. ए.बी. फाटक ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय प्राचीन ज्ञान परंपरा पर गंभीर शोध किया जाना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को व्यावहारिक रूप से साकार किया जा सके। उन्होंने नीति को भारतीय संस्कृति एवं आधुनिक शिक्षा के समन्वय का सशक्त माध्यम बताया।
तकनीकी सत्रों में शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण
उद्घाटन सत्र के पश्चात प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण एवं विचार-विमर्श किया गया। शोध पत्रों में विद्यालय शिक्षा, उच्च शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, भारतीय ज्ञान प्रणाली, बहुभाषिक शिक्षा एवं कौशल विकास जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।
समापन सत्र में शिक्षा नीति की प्रासंगिकता पर चर्चा
संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि श्री विवेक भटनागर, शोध निदेशक, सभ्यता अध्ययन केंद्र, उदयपुर रहे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. मीना गौड, पूर्व चेयरमैन, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी संकाय तथा पूर्व विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उपस्थित रहीं।
समापन सत्र में डॉ. रितु भटनागर ने प्रस्तुत शोध पत्रों का सार प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की वर्तमान एवं भावी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला तथा शिक्षाविदों द्वारा दिए गए सुझावों को समेकित रूप से रखा। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. पीयू जैन द्वारा किया गया।
शिक्षा संस्थानों तक पहुंचेंगे संगोष्ठी के निष्कर्ष
संगोष्ठी में हुई विशिष्ट चर्चाओं से निकले राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विविध पहलुओं को शिक्षा से संबंधित संस्थानों तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। साथ ही विद्यालय एवं उच्च शिक्षा स्तर पर इसके प्रभावी कार्यान्वयन पर विशेष बल देने की बात कही गई।




