मधुमक्खी पालन पर राज्य सरकार का बड़ा अनुदान, किसानों की बढ़ेगी आय
राज्य सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए अनुदान योजना लागू की गई है। किसान कम लागत में शहद उत्पादन कर 80 हजार रुपये तक अनुदान का लाभ उठा सकते हैं। जानिए आवेदन प्रक्रिया और पात्रता।
मधुमक्खी पालन से किसानों के जीवन में घुलेगी मिठास, राज्य सरकार दे रही अनुदान
उदयपुर, 4 फरवरी।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए अनुदान योजना चलाई जा रही है, जिससे किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
कम लागत, अधिक लाभ का व्यवसाय
उद्यान विभाग के उप निदेशक डॉ. कैलाशचन्द्र शर्मा ने बताया कि मधुमक्खी पालन न केवल कम लागत वाला व्यवसाय है, बल्कि यह कृषि, उद्यानिकी, वानिकी और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। मधुमक्खियां परागण के माध्यम से फसलों की पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि करती हैं।
इसके साथ ही शहद के अलावा रॉयल जैली, पराग, मोम और प्रोपोलिस जैसे उत्पादों से भी अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है।


व्यवसायिक मधुमक्खी पालन के लिए श्रेष्ठ प्रजाति
डॉ. शर्मा ने बताया कि इटैलियन प्रजाति की मधुमक्खी (एपिस मैलीफेरा) व्यवसायिक दृष्टि से सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इस प्रजाति की रानी मधुमक्खी की अंडे देने और शहद संग्रह करने की क्षमता अधिक होती है। दो खंड वाले बी-बॉक्स से एक वर्ष में लगभग 40 से 60 किलोग्राम या उससे अधिक शहद प्राप्त किया जा सकता है।
अनुदान के लिए पात्रता
मधुमक्खी पालन अनुदान योजना का लाभ उठाने के लिए किसान के पास न्यूनतम 0.40 हेक्टेयर भूमि का भूस्वामित्व होना अनिवार्य है।
अनुदान का प्रावधान
राज्य सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन के लिए प्रति कॉलोनी और बी-बॉक्स की लागत पर 40 प्रतिशत या अधिकतम 800 रुपये (जो भी कम हो) का अनुदान दिया जाएगा।
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प्रति कॉलोनी लागत: ₹2000
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प्रति बी-बॉक्स लागत: ₹2000
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एक किसान अधिकतम 50 बी-बॉक्स, 50 बी-कॉलोनी और बी-कीपिंग किट प्राप्त कर सकता है।
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अनुदान राशि का भुगतान 60:40 के अनुपात में दो वर्षों में किया जाएगा।
इस प्रकार एक किसान को मधुमक्खी पालन के लिए अधिकतम ₹80,000 तक का अनुदान दिया जा सकता है।
मधुमक्खी माइग्रेशन पर भी मिलेगा अनुदान
मधुमक्खियों के पोषण के लिए पराग और मकरंद आवश्यक होते हैं। यदि किसी क्षेत्र में फूलों की उपलब्धता कम हो जाती है, तो बी-बॉक्स को अन्य जिलों या राज्यों में ले जाने पर परिवहन व्यय पर भी अनुदान का प्रावधान है।
ऐसे करें आवेदन
इच्छुक किसान ई-मित्र केंद्र या अपनी एसएसओ आईडी के माध्यम से राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए जनाधार से प्रमाणित जमाबंदी (छह माह से अधिक पुरानी नहीं) अपलोड करना अनिवार्य है।
अधिक जानकारी के लिए किसान उद्यान विभाग, उदयपुर से संपर्क कर सकते हैं।




