संसद में उठा उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा, सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने उठाई मांग

सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने संसद में उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाया। खेरवाड़ा बालिका महाविद्यालय का उदाहरण देते हुए सरकार से रिक्त पद शीघ्र भरने की मांग की।

संसद में उठा उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा, सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने उठाई मांग

संसद में उठा उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा, सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने जताई चिंता

उदयपुर | नई दिल्ली
सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने सोमवार को संसद में देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की भारी कमी का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण न केवल शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि युवाओं के रोजगार अवसर भी सीमित हो रहे हैं।

नियम 377 के तहत जानकारी देते हुए सांसद डॉ. रावत ने बताया कि हाल ही में उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र अंतर्गत राजकीय बालिका महाविद्यालय, खेरवाड़ा (जिला उदयपुर) में प्रवास का अवसर मिला, जहां अध्ययनरत आदिवासी छात्राओं ने उन्हें अवगत कराया कि महाविद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों के कई पद रिक्त पड़े हैं। इस स्थिति के कारण छात्राओं की पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

सांसद डॉ. रावत ने कहा कि खेरवाड़ा महाविद्यालय केवल एक उदाहरण है। इसी प्रकार की स्थिति देश के लगभग सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में देखने को मिल रही है। देश में करोड़ों युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिन्हें “अमृत पीढ़ी” कहा जा रहा है। इनके कौशल विकास, शैक्षणिक समझ और समग्र व्यक्तित्व निर्माण में अनुभवी एवं स्थायी शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भारी कमी के चलते उच्च शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, साथ ही योग्य युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित नहीं हो पा रहे हैं। यदि शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, तो इससे एक ओर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के माध्यम से सभी राज्यों के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्रातिशीघ्र भरने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही, इस उद्देश्य के लिए केंद्र सरकार द्वारा विशेष केंद्रीय सहायता भी प्रदान की जाए, ताकि देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाया जा सके।